बाल शिक्षा

ख्वाबों को दबाना नहीं , उन्हें उड़ाना है।सारे आसमां को आज दिखाना है

जी हां मैं बात कर रही हूं उन नन्ही सी कलियों की जो आज कहीं ना कहीं मुरझा रही है। भारत में आज भी 72 मिलियन बच्चे ऐसे हैं जो शिक्षा से बहुत दूर हैं। और इसका प्रमुख कारण उनकी आर्थिक परिस्थितियां हैं। जिनकी वजह से वो शिक्षा से इतनी दूर आ चुके हैं। इसी वजह से उन्हें ना चाहते हुए भी भीख मांगना चोरी करने जैसे कार्य करने पड़ते हैं और – इसके बाद हम क्या करते हैं हम उन्हें दुत्कार देते हैं।

दोस्तों हम सब ने चलती राह पर बच्चों को हाथ फैलाते तो जरूर ही देखा होगा । पर कभी आपने सोचा कि वो यह करना चाहते हैं या उनकी मजबूरियां हैं ?

तो चलिए आज आपको बताते हैं कि उनकी क्या मजबूरी है – समाज आज एक ऐसे स्तर पर आकर खड़ा है जहां शिक्षा को दर्पण बोला जाता है। और यह बात की बखूबी अपने में एक बड़ा उदाहरण है शिक्षा के महत्व को समझाने के लिए। चाइल्ड वेलफेयर के एक सर्वे में पाया गया कि अधिकतर बच्चे शिक्षा से वंचित इसलिए रह जाते हैं क्योंकि उनके घर की परिस्थितियां अच्छी नहीं होती जिसकी वजह से उनके माता-पिता उन्हें मजदूरी करने पर लगा देते हैं । पिता की 1 दिन की कमाई राशन भी पूरा नहीं कर पाती।

सर्व शिक्षा अभियान चलते हैं पर शायद बच्चों तक पहुंच ही नहीं पाते जिन्हें इसकी जरूरत है। ( बिना शिक्षा एक मानव दानव बन जाता है) और आज के युग में हम इस बात के से भलीभांति परिचित हैं। वो नन्हे हाथ बस किसी के घर में बर्तन धुलने या मिट्टी उठाने में सूख जाते हैं।

तो चलिए एक शुरुआत करते हैं बाल शिक्षा की ।

Dreams & Deeds organisation के संग और देते हैं नन्ही कलियों को एक ऊंची उड़ान, और उनकी खुद की पहचान।

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